अभिप्रेरणा (Motivation)

Motivation शब्द की की उत्पत्ति लैटिन भाषा मोटम से हुई है जिसका अर्थ ” To More” यानी गति करना होता है|

गुड – किसी किसी क्रियाया कर को कार्य को करने आराम भी आरंभ करने जारी रखने तथा नियमित करने की प्रक्रिया अभिप्रेरणा कहलाती है|

लावेल- अभिप्रेरणा एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो आवश्यकता से आरंभ होती हैतथा उन साधनों की ओरले जाती है जो आवश्यकता को संतुष्ट करती है

अभिप्रेरणाहमारेक्यों का उत्तर देती है

अभिप्रेरणाकी विशेषतामें प्रकृति

अभिप्रेरणा व्यक्ति की आंतरिक अवस्था है

अभिप्रेरणा अवस्था से आवश्यकता से प्रारंभ होती है

अभिप्रेरणाएक मनोवैज्ञानिक भावात्मक प्रक्रिया है

अभिप्रेरणा एकक्रमिक व्यान्नात्मक भीमज्ञान आत्मकप्रक्रिया है

ध्यान केंद्रित

अन्नपूर्णा की गति अभिप्रेरणा की गति प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग होती है

अभिप्रेरणा लक्ष्य प्राप्ति तक चलने वाली प्रक्रिया है अभिप्रेरणा लक्ष्य को प्राप्तकरने का साधन है

अभिप्रेरणा के प्रकार

आंतरिकस का रात्मक प्राकृतिक अभिप्रेरणा

अभिप्रेरणा नकारात्मकऔर प्राकृतिक आप प्राकृतिक अभिप्रेरणा

1. आंतरिक अभिप्रेरणा

आंतरिक अभिप्रेरणा जब किसी क्रिया या कार्य को स्वयं की इच्छा से करता हैतथा जिसको करने से सुख या संतोष की प्राप्ति होती है

यह अभिप्रेरणा किसी भी कार्य को आरंभ करती है

जैसे-भूख,प्यास ,कम, नींद ,मल मूत्र त्याग, मातृत्वप्रेम सफलता की इच्छा आराम खेल-प्ले आत्म सम्मान विद्या भाव आदिश्रद्धाभाव आदि

2. ब्राha अभिप्रेरणा अभिप्रेरणा नकारात्मक आप प्राकृतिक अभिप्रेरणा

ब्रा अभिप्रेरणा अभिप्रेरणा नकारात्मक आप प्राकृतिक अभिप्रेरणाजब किसी कार्य को स्वयं की इच्छा से ना करके दूसरे के दबाव में आकर करता है

जैसे-प्रशंसा पुरस्कारदंडफिर 30 स्पर्धाप्रति स्पर्धा सहयोग शिक्षा शिक्षक सहायक सामग्री लक्ष्य तथा शिक्षक छात्र संबंध भी वह प्रेरक में आता है

अभिप्रेरणा के तत्व

अभिप्रेरणा के तत्व आवश्यकता यह दो प्रकार की होती है सहायक और मनोवैज्ञानिकअवस्था बहुजन पानी कहां मल मूत्रमनोवैज्ञानिक अवस्था प्रेम सुरक्षा अब सम्मान उपलब्धि संबंध

 अब्राहम मास

सिद्धांत आवश्यकता पदानुक्रम1954 में दिया शारीरिक सुरक्षाप्रेम सम्मान आप सिद्धिआतम सिद्धिविशेषवैष्णो नेवैष्णोने1959इस सिद्धांत में तीन आवश्यकता और जोड़ीउत्तेजना की आवश्यकता एकीकरण समग्र की आवश्यकता आध्यात्मिक आवश्यकता चालक प्रणोदअंतरराशचालक शरीर की आंतरिक क्रिया या दशा हैजो विशेष प्रकार का व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता हैजैसे भूख प्यास आदि उद्दीपन प्रोत्साहन जिस तत्व द्वारा चालक की संतुष्टि होती हैउसे वहउद्दीपन या प्रोत्साहन कहलाता है यह दो प्रकार का होता हैसकारात्मक और नकारात्मक विशेष देसी में संज्ञा को अभिप्रेरणा चक्र में शामिल किया है

जॉन जॉन पीविषय कौनहै अल्पना के चार तत्व बताएंउत्तेजना प्रोत्साहन आकांक्षा दंडगट्स वह अन्य की अनुसारप्रेरक प्राणी के भीतर की भी दशा है जो निश्चित वीडियो के अनुसार कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैंमसलों के अनुसार प्रेरकों का वर्गीकरणजन्मजात प्रेरकभूखकैनन व वशीकरणबसने इसका अध्ययन किया शरीर की मांसपेशियों में संकुचन होने तथा चीनी की मात्रा में कमी होने पर भूख नमक प्रेरक उत्पन्न होता हैएपिस्टम ने प्यास पर डबल डिप्रेशन सिद्धांत दियाबताया कि प्यास के दो कारण होते हैंपानी की कमी से तथा रक्त की कमी से कम रामायण नींद करंट मां मां मूत्र त्याग प्रेरक नींद भी दो प्रकार की होती है

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